मर चुके प्रेमी के खत – Chapter 3

दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला और उस पल जैसे मेरी रूह बाहर निकल कर ठंडे हवा में तैरने लगी, दरवाज़े के बाहर जो शख़्स खड़ा था उसकी साया ने पूरे कॉरिडोर को निगल लिया था, मैं चाबी अब भी हाथ में कसकर पकड़े खड़ी थी, दिल गले में था और हर सांस एक भारी दबे हुए सवाल की तरह कानों में गूंज रही थी; सामने जो सिल्हूट था उसने पहले हठपूर्वक सिर झुकाए रखा, फिर धीरे-धीरे उसने अपना हूडी का हुड खींचा, उसकी उंगलियाँ ब्रैसलेट वाली तरह पतली और मजबूत दिखीं, और जैसे ही वो हुड हटने लगा मुझे एक झटका लगा—चेहरा आधा अँधेरे में छिपा हुआ था लेकिन उजले हिस्से में एक गहरी लकीर, एक पुराना दाग सा लिपटा हुआ था, और वो दाग मैं अच्छी तरह जानती थी क्योंकि मैं उसी को बार-बार Aarav के किसी पुराने फोटो में देख चुकी थी; मेरे मन में एक अजीब-सा सन्नाटा छा गया, मैं खुद को रोक नहीं पाई और एक आवाज़ निकली जो शायद मेरी जुबान का नहीं, मेरी यादों का हिस्सा थी—“Aarav?”—और सामने खड़ा हुआ आदमी थमा, उसकी आँखों में कुछ जलन थी, कुछ पछतावा था और कुछ ऐसा भी था जो उसे बार-बार सच से दूर खिंच रहा था, उसने धीरे से कहा, “मैं Aarav नहीं हूँ, पर मैं उसे अच्छी तरह जानता हूँ, और अब वो चीज़ जो तुम समझती हो ‘मर जाना’… वह तुमको पूरे सच का सिर्फ़ आधा हिस्सा बता रही है।” मेरे पैरों के नीचे जैसे ज़मीन खिसक गई और सारी रात की ठंडी हवा अचानक मेरी रीढ़ में चुभने लगी, मैंने चाबी और ब्रैसलेट दोनों की तरफ नज़र घुमाई और उसी पल सामने वाला आदमी एक कदम भीतर आया, उसकी चाल में थकान थी पर इरादा ठोस था—वो मेरे घर के अंदर आया, बिना अनुमति के, और जैसे ही उसने कदम रखा उसने पाँव के पास रखी टूटी हुई तस्वीर उठाई और उस पर लिखा एक नया शब्द दिखाया जिसने मेरी रूह में जैसे आग जगा दी—“सत्य।” उसकी आवाज़ धीमी थी, पर हर शब्द एक पोर में धंस गया, “Anushka, तुमने जो खामोशी को प्यार समझा, वो कहीं काड़ी साज़िश का हिस्सा है, और अगर तुम सच जानना चाहती हो तो तुम्हें मेरे साथ आना होगा, तुम्हें उस जगह पर जाना होगा जहाँ से सब शुरू हुआ था—जहाँ ‘751-A’ का मतलब खुलता है।” मैंने पलकें झपकाईं, मेरा दिमाग ऐसे सवालों से भर गया कि साँसें भी रास्ता भूल गईं—क्या ये कोई दोस्त है? क्या कोई साथी? क्या कोई शख़्स जो Aarav की मौत का राज़ जानता है? या फिर कोई वो जिसने मेरे ऊपर खेल रचा है? उसकी आँखों में चोट के निशान थे, और उसने अपनी कलाई उठाई तो उसी पर वही हल्का-सा कट दिखाई दिया जो मैंने दो साल पहले देखा था—वही निशान जो Aarav की उंगली पर था, वही निशान जिसे मुझे याद था—क्या यह आदमी Aarav का जुड़वां भाई है? क्या यह वही दोस्त है जिसने Accident के बाद सच्चाई को दबा दिया? मेरे दिमाग में सवालों की बूँदें छलकने लगीं और मैं अपने आप को संभालते हुए बोली—“तुम कौन हो? और ये सब… ये खत, ब्रैसलेट, फोटो—ये सब क्यों मेरे पास आये?” उसने मेरे सवाल का जवाब देते हुए धीमे से कहा, “नाम अभी जरूरी नहीं, पर मैं तुम्हारे लिए एक साबित सच रखता हूँ—ये ब्रैसलेट तुमको वापस इसलिए मिला क्यूंकि उसने चाहा कि तुम सच देखो, पर सच देखने से पहले तुम्हें उस रात की हवा को साँस में लेना होगा, वही हवा जो उसे ले गई थी और जिसे उसने लौटकर किसी नोट में बंद कर दिया था; मैं उस रात वहाँ था, मैं देख रहा था, मैंने देखा कि कुछ लोगों ने वहाँ आकर कुछ किया, और मैंने खुद को इस तरह रख दिया जैसे मैं बचपन का कोई दोस्त हूँ—पर मैंने देखा, और मैं अब उदास हूँ कि सच्चाई तुमसे छिपी रही।” उसकी बातों में जितना दुख था उतनी ही हिचकिचाहट भी और मैं उसके करीब नहीं जाने की कोशिश कर रही थी पर मेरे अंदर की जिज्ञासा, जो एक प्यार-भरी mystery love story की तरह मुझसे चुटकी ले रही थी, हर बार जोर से कहती कि मैं जाना चाहती हूँ, पता लगाना चाहती हूँ कि मेरा प्रेम सचमुच मर गया था या उसे किसी ने मार दिया था; उसने फिर एक कदम बढ़ाया और खिड़की की ओर इशारा करते हुए कहा, “तुम्हारे खिड़की के पास जो निशान थे, वो मेरी उँगलियों के निशान नहीं हैं, पर वो निशान वही कर सकता था जिसने रात में तुम्हारे घर को टटोल कर रखा—मैंने उसे देखा, उसका चेहरा आधा ढका था, पर उसकी आँखें… उसकी आँखें तुम्हारी तरह की थीं, और उसने कहा था—‘वो हमेशा उसके पास रहेगा’—और उसने वही शब्द दोहराए जो तुमने Aarav के आख़िरी note में पढ़ा था।” मेरा मन तेज़ी से बटक रहा था, हर खंड मेरे अतीत से जुड़ने का प्रयास कर रहा था और उस शख़्स की आवाज़ जो अब थोड़ी नरम हो चुकी थी मेरे कानों में बार-बार echo कर रही थी—“751-A एक locker नहीं, एक code है, एक जगह है जो तुम्हारे शहर के किनारे पर एक पुराना गोदाम बताती है जहाँ कई साल पहले Aarav ने कुछ खोजा था—उसने कुछ खोजा था जो किसी को पसंद नहीं आया।” मैं उसकी बात से झटके में चौंकी, क्यों कोई आदमी किसी ‘खोज’ के लिए इतना परेशान होगा, फिर भी मेरा मन इस बात को पकड़कर चल पड़ा कि Aarav ने जिन चीज़ों को रखा था, किसी के काम की चीज़ों से जुड़ी थीं; सामने वाला आदमी धीरे-धीरे अपना हुड ऊपर खींचने लगा और उसकी गर्दन पर एक ताज़ा बयान की तरह काला धब्बा नज़र आया—एक छोटा tattoo या गहरा दाग, जिसे देखकर मैं अपनी आँखें नहीं हटा पाई; उसने फिर कहा, “मैं तुम्हें झूठ नहीं बोल रहा, मैं Aarav का दोस्त रहा हूँ, मैंने उसकी हर बेवफ़ाई और उसकी हर हकीकत देखी है, पर मैंने उसे कभी नहीं पकड़ा कि वह किसके साथ था; उस रात उसकी बाइक टूटने से पहले वह किसी से मिला था, और मैंने उसे देखा—वह मिलन किसी मज़बूरियों का परिणाम नहीं था, वह योजना थी, और आख़िरकार उसने तुम्हें बचाने की बजाय खुद को बचाने की कोशिश की; अगर तुम्हें पूरा सच चाहिए तो तुम्हें मेरे साथ बस आज रात उस गोदाम में आना होगा।” मेरे अंदर विरोध और तड़प दोनों उमड़ने लगे, मुझे उसकी बातों पर यकीन करने में दिक्कत हो रही थी पर वो मेरे लिए एक रास्ता भी दिखा रहा था—एक ऐसा रास्ता जो मेरी romantic suspense की कहानी को सच के निकट ले जा सकता था, वही सच जिसे मैं क्यों जानना चाहती थी, शायद इसलिए कि मेरा दर्द जवाब चाहता था, शायद इसलिए कि एक real incident type story की तरह कुछ बातें सिर्फ़ तब ही बंद होती हैं जब उनका अंत देखा जाए; मैंने काफी समय तक सोचा नहीं किया, डर और उम्मीद के बीच, मैंने एक कमजोर “ठीक है” कहा, और मेरे शब्द कमरे में ऐसे गूँजे जैसे किसी बंद कलश से पानी गिरा हो—वो आदमी मुस्कुराया, और उस मुस्कुराहट में एक भारी थकावट थी, उसने मुझे एक मोटी कागज़ की फाइल दी, उस पर कुछ पुराने समाचार कटिंग्स, पुलिस की रिपोर्ट्स की फोटोकॉपीज़ और एक फोटो जो उसने उसी रात ली थी—उसी जगह की, वही टूटी बाइक की तस्वीर पर एक स्याही में लिखा शब्द था—“नज़र रखा गया”—और फोटो के कोने में कुछ और था—एक नाम, जिसे पढ़कर मेरे होंठ बाहर निकल आये क्योंकि वो नाम मुझे अजीब तरह से परिचित लगा, वो कोई सेल्समैन या कोई commonplace आदमी नहीं था, वो एक ऐसा नाम था जो शहर के कुछ ऊँचे लोगों से जुड़ा हुआ था, और इसी शहर में जिनके ऊपर Aarav ने सवाल उठाए थे; मेरे हाथ फाइल पकड़ कर काँप रहे थे, उसी वक्त मैंने देखा कि टेबल पर रखा एक पुराना सिगरेट का खंड भी वहीं रखा है जो मुझे हमेशा Aarav की जेब से मिलता था, पर उस पर सूजी हुई राख में एक अलग तरह की खुशबू मिली, और सामने वाला आदमी बोला, “हमारे पास इस कहानी को साबित करने के लिए सबूत हैं, पर सबूत किसी का होकर भी बेअसर हो जाते हैं जब लोग मिलकर सच को दबा देते हैं; तुम मेरे साथ आओगी तो हम ये सब उजागर कर पाएँगे—पर एक बात मैं साफ़ कर दूँ—अगर तुम मेरे साथ आओगी तो यह तुम्हारी ‘love story hindi’ जैसी घिसी-पीटी कहानी नहीं रहेगी, यह एक emotional thriller बन जाएगी जिसमें हर मोड़ पर suspense story जैसा माहौल होगा, और शायद तुम्हें वो सच मिल जाए जो आज तक छिपा रहा है।” मैंने उसकी आख़िरी बात पर एक जोर की साँस ली और तभी कमरे की घड़ी ने घड़ी की सूई को 3 बजाकर हिट किया, बाहर की हवा अचानक तेज़ हुई और खिड़की पर कुछ बिजली की चमक टिमटिमा गयी, सामने खड़ा आदमी मेरी आँखों में देखा और धीरे-धीरे मेरे हाथ से ब्रैसलेट उठा लिया, उसे अपनी कलाई पर कसकर पहनते हुए गर्जना तरीके की आवाज़ में बोला—“आओ, Anushka, समय का पहिया घूम चुका है, और जो चीजें मर चुकी लगती हैं वे अक्सर सच्चाई की आंच में फिर से जिंदा हो जाती हैं।” मैं एक बार फिर अपने आप से पूछ रही थी कि क्या मैं चलूँ, क्या मैं भाग जाऊँ, पर मेरे भीतर की आवाज़ जो अब तक चुप थी उसने ज़ोर से कहा—“नहीं, चलो”—मैंने चाबी जेब में रखते हुए दरवाज़े के पास रखा फोन बंद कर दिया, और हम दोनों अँधेरे में बाहर निकले, नीचे गली में एक मोटरसाइकिल रुकी थी, आदमी ने उसका हेडलाइट जला कर कहा—“हम समय से पहले किसी से न भिड़ें, पर जो भी होगा उसे मैं तुम्हें सच बताकर छोड़ दूँगा”—और जैसे ही हम गली की मोड़ पर आए एक बड़ी बिल्डिंग के पास वह आदमी अचानक रुक गया, उसने पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखा, आँखों में अब भी कुछ छिपा हुआ था, और उसने एक आख़िरी बात कहा—“अगर तुमने सच्चाई देख ली तो याद रखना, कभी-कभी प्यार की कहानी जो ‘mystery love story’ बन जाती है, वह तुम्हें सबसे ज्यादा बदल देती है।” और उसी वक्त, जैसे किसी ने पर्दा हटाया हो, बिल्डिंग के एक दरवाज़े ने अपने आप अंदर से एक चीख़ सी निकाली और वो दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला—और भीतर से वही आकृति निकली जो आख़िरी फोटो में खड़ी थी—काली हूडी, चेहरा ढका हुआ—और जब उस आकृति ने अपना चेहरा उठाया तो जो मैंने देखा उसने मेरा जी उधा दिया, क्योंकि वो चेहरा… वो अर्ध-परिचित, पर किसी तरह Aarav से अलग चेहरा… उस पर एक गहरी लकीर थी जो Aarav की मुस्कान के बायीं तरफ थी, और जैसे ही उसने आँखें उठाईं मैंने देखा कि उसके दाँतों के बीच कुछ चमक रहा था—वही छोटा सा metallic चीज़ जो मैं गायब हुए ब्रैसलेट के अंदर देख चुकी थी—और उसी स्टीली चमक के साथ, सामने वाले आदमी ने मेरी आंखों के सामने एक धीमा-सा मुस्कान दिया और कहा—“तुम तैयार हो, Anu?”—और बस उसी शब्द के साथ Chapter 3 खत्म होता है, जब मैं उस चेहरे को देख कर समझ नहीं पा रही थी कि सच में मेरा अतीत मेरे सामने खड़ा है या कोई ऐसा खेल जिसे मैं अब तक समझ ही नहीं पाई;

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