दरवाज़ा हमारे पीछे धीरे-धीरे बंद हुआ और जैसे ही वह क्लिक हुआ, कमरे की हवा में बैठी सारी रात की चुभन अचानक सुलग उठी—एक ऐसा पल था जिसमें वक्त ठहर गया, और मेरे भीतर के सारे सवाल एक साथ एक ही दिशा में धकेल दिए गए; हम दोनों—मैं और वह शख़्स—खामोशियों के उस पुल पर खड़े थे जिसने मुझे दो साल से खींच रखा था, उसके हाथ में अब वही ब्रैसलेट था जिसे मैंने सोच लिया था कि हमेशा के लिए खो चुका हूँ, पर उसकी आंखों में एक तरह का कटु संतोष और भारी थकान दोनों साथ साथ थे; उसने पहले ही कहा था कि वो Aarav नहीं है, पर अब, जब उसने मेरी तरफ़ मुड़ कर देखा, तो मैं समझ गयी कि वह उस रात का गवाह जरूर था—और उसके पास सच का वो हिस्सा था जो दो साल तक मेरे सीने में चुभता आया था। उसने मैंने जो फाइल दी थी उसे फिर से अपनी जगह रख लिया और उसकी आवाज़ जो अब नरम हो चुकी थी, धीरे से बोली—“जो मैं बताने जा रहा हूँ वो सिर्फ़ तुम्हारे लिए है, और मैं जानता हूँ कि सुनने से पहले तुम्हें सहना पड़ेगा।” मैंने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—“ठीक है, सब कहो—अब और देर नहीं।” और उसने शुरू किया—वो रात, वो बारिश, वह मोड़, और वह आदमी जिसे आख़िरकार उसने देखा था; Aarav ने शहर के उन ऊँचे लोगों की एक छोटी सी चेक-लिस्ट बनाई थी—नाम, फोन, कुछ तारीखें और एक लोकेशन—751-A—इसी का मतलब था कि वो किसी पुराने गोदाम में गया था जहाँ शहर के उन रसूखदारों के काले काम छिपे हुए थे; उसने पाया था कि कुछ लोग जमीन की रखवाली के बहाने illegal चीज़ों को दूसरे राज्यों में भेज रहे थे—किसी तरह की trafficking, बड़े पैमाने पर रिश्वत और एक छोटी सी evidence file जो सब कुछ उजागर कर सकती थी। Aarav ने उस evidence को अपने पास रखा था और मुझे बताने का मन किया था, पर किसी ने उसे पकड़ा, किसी ने उसे मारा और फिर सब इत्मीनान के साथ कह दिया कि उसे हादसा हुआ—उस रात जो बाइक से गिरा हुआ नाम पहले न्यूज़ में गया, वह सच में सिर्फ़ एक हादसा नहीं था; उसने कुछ देखा था, और वही देखने से उसकी जिंदगी बदल गयी।
“तो तुमने क्यों खत भेजे?” मैंने पूछा, क्योंकि उसके इन सब खुलासों के बीच मेरी एक छोटी सी उम्मीद अभी भी उभर रही थी—कि शायद Aarav ने खुद मुझे बचाने के लिए ये सारा खेल रचा होगा। वो आदमी—जो अब सामने खड़ा था और जिसकी गर्दन पर वही हल्की कट दिखाई देती थी—ने मुस्कुराकर कहा, “मैंने खत इसलिए लिखे क्योंकि मैं चाहता था कि तुम धीरे-धीरे सच तक पहुँचना सको; अगर मैंने एकदम सब बता दिया होता तो तुम नहीं मानतीं, तुम डर जातीं, और सारी सच्चाई फिर भी वही धूल में दब जाती—Aarav चाहता था कि तुम मजबूत बनो, वह चाहता था कि तुम जानो कि उसने तुमसे झूठ नहीं बोला था, उसने सिर्फ़ तुम्हें उस सच्चाई से दूर रखा ताकि कोई तुम्हें खिड़की से चेक कर के मार न दे।” उसकी बातों में जो दर्द था उसने मेरे दिल पर हाथ रख दिया—मैंने दो साल तक उस दर्द को अकेले ही सहा था, और अब सच मेरे सामने था, खरा, कड़क, और खून की तरह चुभ रहा था। उसने आगे बताया कि 751-A एक पुराना गोदाम था, शहर के बाहर की ओर—a storage unit compound—जहाँ Aarav ने कुछ तस्वीरें और document रखा थे जो यह साबित कर सकते थे कि किस तरह से जमीनों के कागज़ों में छेड़छाड़ करके लोगों की जमीनें गायब कर दी जाती थीं, और जिन रास्तों से सामान भेजा जा रहा था, वही रास्ते बड़े लोगों के influence से गुज़रते थे; Aarav ने एक बार किसी बात पर आवाज़ उठायी थी और तभी कुछ लोगों ने उसे टार्गेट कर लिया—उस रात उसकी बाइक अचानक कटी, उससे पहले किसी ने उसे घेर लिया, और मेरे सामने शर्मा-सा खड़ा हुआ शख़्स बोला—“मैं वहाँ था, मैंने उसे देखा, मैं दौड़ कर आया, और मैं नहीं रोक पाया।”
उसकी हँसी में कोई कड़वाहट नहीं थी—वह सिर्फ़ थक चुका था, और उसकी थकान ने ही उसे साहसी बना दिया; हमने फैसला किया कि हमें उस गोदाम की चाबी, जो 751-A पर लिखी थी, आज रात खोलनी है, और जो सच हम देखेंगे उसे पुलिस और मीडिया के सामने रखना है—पर उसकी शर्त थी, “तुम अकेली नहीं चलोगी, और अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें वहां ले जाऊँगा; पर सच जानने के बाद जिंदगी तुम्हारे लिए वैसी नहीं रहेगी, क्योंकि जब बड़े लोग सच छिपाते हैं तो वे हर हद पार कर जाते हैं।” मैंने उसकी आँखों में देखा और अपनी उंगली में तेजी से चाबी दबा ली; उस चाबी में मेरी सारी यादें, मेरी सारी उम्मीदें दब कर बैठ गयी थीं और मैंने सोचा कि अब जो भी होगा, मैं सच को जानने के बाद शांति पा लूँगी। हम मोटरसाइकिल पर बैठे और शहर की उन सुनसान लंबी सड़कों से गुज़रे जिनसे रात में हवा तेज़ बहती थी—रोशनी कम, पर आसमान साफ़—और जैसे ही हम गोदाम के पास पहुँचे, मैंने देखा कि वह जगह पहले से सुनसान थी, पर आज रात वहाँ कुछ अलग सा चल रहा था; दरवाज़े पर एक छोटा सा ताला था—751-A—और वो वही ताला था जिसे मैंने पहले कभी नोटिस नहीं किया था, क्योंकि रात के तरह-तरह के shades ही सच छुपाते हैं। उसने चाबी घुमाई और ताला खुला; अंदर से आती अगली धूल ने मेरी सांसें उड़ायीं—यहाँ पर बक्सों की पंक्तियाँ थीं, कुछ फटे हुए कागज़ और बेमकसद रखे हुए सामान, पर बीच में एक छोटी सी लकड़ी की अलमारी थी, और उसकी पहली drawer में वही फाइलें रखीं थीं—photocopies, voice-recordings की devices, कुछ video files के hard drives—और उनके ऊपर लिखा हुआ था Aarav का नाम; मैंने अपने हाथों से फाइल उठाई और उसे खोला—एक वाली में एक वीडियो थी जिसमे Aarav खुद कैमरे के सामने बैठा हुआ था और उसने बोला—“अगर तुम ये देख रही हो Anu, तो समझ लो कि मैंने वो सब किया जो मैं सच समझता था; यदि मैं इस दुनिया में नहीं हूँ तो तुम्हें ये दिखाना मेरी आख़िरी उम्मीद है।” उसके शब्दों में कड़वाहट कम, मजबूरी ज़्यादा थी—और जैसे ही मैंने वीडियो चलाया, मैंने देखा कि उसने लोग नाम लिए थे, उसने कहा था कि कुछ लोग शहर के बड़े घाघों के नीचे छुप कर गलत काम कर रहे हैं, उसने गोदाम के receipts दिखाए थे, और एक बार जब उसने camera off किया, उसने softly कहा—“Anu, मैं नहीं चाहता कि तुम परेशान हो; अगर मैं लौट आएँ तो मैं सब कुछ ठीक कर दूँगा।” मेरे सीने में कुछ टूटता हुआ सा लगा—आँखों में गर्मी भर आई और तभी गोदाम के पीछे से किसी के कदमों की आवाज़ आई; मैंने भीतर झाँका और देखा कि वही काली हूडी वाली आकृति, वही चेहरा जिसमें वह अर्ध-परिचित लकीर थी, अब बिना किसी नकाब के सामने खड़ा था—और उसके हाथ में एक गन थी।
वो समय कुछ पल के लिए काला पड़ गया—मानो हीरोइन वाली फिल्म का वो सीन जो अचानक वास्तविकता बन गया हो; आदमी ने एक धीमी आवाज़ में कहा, “तुमने बहुत दूर आ लिया है, और अब जो चीज़ों को मैंने छुपाया था, वो बाहर आ रही हैं।” मैंने झट से फाइल अपनी छाती से दबा ली और पीछे हटना चाहा, पर सामने वाला आदमी आगे बढ़ आया—उसकी आँखों में बेशर्मपन और घनघोर ठण्डक दोनों थीं; उसी समय पीछे से एक तेज़ सी आवाज़ आई और पुलिस की blinkers भूलने वाली driveway की रोशनी ने पूरे गोदाम को रंग दिया—किसी ने Aarav की evidence की copies पहले ही सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी थीं, वही शख़्स जो मेरी तरफ़ खड़ा था—जो Raghav नहीं था पर वह Aarav का पुराना सहपाठी और दोस्त निकला—उसने sacrifice के तौर पर खुद को खतरनाक मोर्चे पर रखा और उसने जाना था कि अगर वह वहाँ खड़ा रहेगा और सच बाहर निकलेगा तो उससे बड़ी हिम्मत की बात और क्या होगी; सामने वाला आदमी झुका और गन जमीन पर गिर गयी, कुछ मिनटों में पुलिस अंदर घुस आई, और वही लोग जो वर्षों से छाया बनकर घूम रहे थे, अब अपने नेटवर्क के फंदों में फँसते दिखे।
उस रात की सबसे बड़ी सच्चाई यह थी कि Aarav मरकर कभी पूरी तरह नहीं गया—वह बच गया, पर उसे मजबूर किया गया कि वह गायब हो, और कुछ समय बाद उसे फिर से पकड़ लिया गया; पर Raghav ने उसे ढूँढ निकाला और उस गोदाम में छुपा कर रखा जब तक कि वह recover न हो सके; उसका plan था कि जब सबूत स्तर पर पुख़्ता हो जाएंगे तो वो उन्हें सार्वजनिक कर देगा—और आज उसने कर दिखाया—पर कीमत चुकानी पड़ी: सामने वाला आदमी भागते हुए गोली चला बैठा, Raghav ने मुझे धक्का देकर बचाया और खुद गोली के निशान से घिरा हुआ निधन के करीब चला गया। उसने मेरी तरफ़ झुककर आख़िरी बार देखा, उसकी आँखों में वही थकान थी पर अब उसके चेहरे पर सुकून भी था—“Anu, यह तुम्हारी कहानी का अंत नहीं, पर तुम्हारा नया आरंभ है,” उसने कहा और उसकी उँगलियाँ मेरी हथेली पर ढीली हो गयीं; मैंने रोते हुए उसे पकड़ा और उसे गले लगा लिया, और उसने जैसे ही मेरी ठंडे होंठों पर एक कमजोर मुस्कान छोड़ी, उसकी आँखें बंद हो गयीं—वह शख़्स जिसने दो साल तक अकेले सच को संभाले रखा, उसने अपनी आख़िरी साँस में सच बाहर निकालने की वजह बनकर खुद को समर्पित कर दिया।
पुलिस ने केस दर्ज किया, मीडिया ने रिपोर्ट की, और उन ऊँचे लोगों के खिलाफ एक investigation शुरू हुई—कुछ गिरफ्तारियाँ हुईं, कुछ बरी भी हुए, लेकिन सबसे ज़रूरी बात ये थी कि Aarav की मेहनत बेकार नहीं गयी; उसकी फाइलों ने शहर में एक ऐसी चिंगारी जलाई कि लोगों ने सवाल करना शुरू कर दिया। मैं अस्पताल के पास जाती रही, जहाँ Aarav बुरी तरह घायल था पर ज़िंदा था—उसका चेहरा बदल चुका था, वह उस Aarav जैसा नहीं था जिसे मैं जाने पहचाने प्यार करती थी, पर उसकी आँखों में वही familiar warmth थी; उसने अपनी चल्दी आवाज़ में मुझसे कहा—“Maaf kar do mujhe,” और मैंने उसकी कलाई पकड़कर कहा—“हमने जो खोया, वो लौट आया है, और जो मिला, वो हमें आगे बढ़ा देगा।” हमने दोनों मिलकर उस ब्रैसलेट को देखा—अब वो उसकी कलाई में था—और मैंने महसूस किया कि कुछ चीज़ें सच में मरती नहीं, वे बस एक नए रूप में लौट आती हैं; हमने Raghav को विदा किया, और उसकी याद हमारे बीच एक ऐसा जज़्बा बन गयी जो न सिर्फ़ सच्चाई के लिए लड़ता था बल्कि प्यार को भी नयी राह देता था।
कहानी का अंत इतना साफ नहीं था कि सबकुछ तुरंत न्याय के कबूतर की तरह उतर जाएँ—पर एक बात थी जो मैंने सीखी: प्यार और सच्चाई दोनों ही fragile हैं, पर अगर किसी ने उन्हें सही समय पर पकड़ा तो वे सबसे बड़े अँधेरों को भी रोशन कर देते हैं। मैंने Aarav की आँखों में देखा—वह कमजोर था पर आँखे अब कुछ और कह रही थीं; हमने शहर छोड़ने की योजना बनाई, एक नई जगह जहाँ कोई हमारे अतीत की परछाइयों को नहीं पहचान पाए, पर हमने वादा किया कि हम Raghav की तरह चुप नहीं बैठेंगे—हम सच के लिये आवाज़ उठाएँगे। आख़िरी दृश्य में हम दोनों बारिश में बाहर निकले—monsoon की ठंडी हवा हमारी कारी-भरी रात को धो रही थी—और मैंने ब्रैसलेट उसकी कलाई में देखा, वही स्टीली चमक अब हमारी नई शुरुआत का प्रतीक बनी हुई थी; मैंने उसकी तरफ़ देखा, उसने धीरे से मेरी उँगलियाँ थामीं और कहा—“चलो,” और हम दोनों ने साथ चलना शुरू किया—यह यात्रा खत्म नहीं थी, पर जो chapter बंद हुआ वह एक जमाव था, एक सच्चाई का, और उसी सच्चाई के बीच हमने समझा कि मर चुका प्रेम भी खतों में, चाबियों में और खून के धब्बों में लौट कर आ सकता है—पर अंततः वही लौटता है जो ज़िंदा रहना चाहता है: इश्क़, ज़िम्मेदारी और सच।

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